लंपी स्किन डिज़ीज़ (LSD, गाँठदार त्वचा रोग) गाय और भैंस का वायरस से होने वाला रोग है। इसमें बुख़ार आता है, चमड़ी पर सख़्त गाँठें उभरती हैं और दूध साफ़ घट जाता है। यह मुख्य रूप से काटने वाले कीड़ों से फैलता है, और ज़्यादातर पशु ठीक हो जाते हैं। जुलाई 2026 से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों में छिटपुट मामले आए हैं। अगर किसी पशु को बुख़ार हो और चमड़ी पर गाँठें दिखें, तो उसी दिन पशु चिकित्सक को बुलाएँ।
- LSD सिर्फ़ गाय और भैंस को होता है। WOAH के अनुसार इंसानों को इससे ख़तरा नहीं है, दूध या मांस से भी नहीं।
- बुख़ार, भूख कम होना, लसीका ग्रंथियों में सूजन, और सिर, गर्दन, थन व योनि या अंडकोष के आसपास 0.5 से 5 सेमी की सख़्त गाँठें देखें।
- काटने वाली मक्खियाँ, मच्छर और चिचड़ी वायरस फैलाते हैं। बीमार पशु को छूने से फैलने का हिस्सा छोटा है।
- 8 सितंबर 2026 को पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 3,461 सक्रिय मामले गिने, ज़्यादातर छोटे और बिना टीके वाले पशुओं में।
- DAHD ने राज्यों से कहा है कि टीकाकरण करें, बीमार पशु अलग रखें, कीड़ों पर क़ाबू रखें और नए पशुओं को क्वारंटीन करें।
लंपी स्किन डिज़ीज़ क्या है, और क्या दूध सुरक्षित है
LSD कैप्रीपॉक्स वायरस से होता है। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार यह सिर्फ़ गाय और भैंस को संक्रमित करता है। यह ज़ूनोटिक रोग नहीं है, यानी बीमार पशु को छूने से या दूध और मांस खाने-पीने से इंसानों को ख़तरा नहीं है। ख़तरा आपकी आमदनी को है: दूध कम, वज़न घटना, प्रजनन क्षमता में कमी और खाल का ख़राब होना।
बीमार पशु के दूध का क्या करें, यह अपने पशु चिकित्सक या दूध यूनियन से पूछ लें, क्योंकि स्थानीय नियम और डेयरी की शर्तें अलग हो सकती हैं।
कौन से लक्षण देखें
WOAH लक्षणों को लगभग उसी क्रम में बताता है जिसमें वे आते हैं:
- बुख़ार। यह 41°C से ऊपर जा सकता है, और पशु कम खाता है।
- चमड़ी पर गाँठें। बुख़ार के लगभग 48 घंटे के भीतर सख़्त, ऊपर से चपटी गाँठें उभरती हैं, अक्सर सिर, गर्दन, थन, अंडकोष, योनि और उसके आसपास। इनका आकार 0.5 से 5 सेमी होता है।
- लसीका ग्रंथियों में सूजन, और थन, छाती व टाँगों में सूजन।
- दूध में गिरावट। WOAH दुधारू पशुओं में इसे साफ़ गिरावट कहता है। इसके बाद वज़न घटता है।
- बाद के लक्षण। कुछ गाँठें सख़्त, मरी हुई चमड़ी के गुच्छे बन जाती हैं जो झड़कर घाव छोड़ जाते हैं। ये धीरे भरते हैं और निशान छोड़ते हैं। प्रजनन क्षमता भी घट सकती है, कुछ समय के लिए या, सांडों में, हमेशा के लिए।
बुख़ार या चमड़ी पर गाँठें कई बीमारियों में होती हैं। LSD की पुष्टि सिर्फ़ पशु चिकित्सक, ज़रूरत पड़ने पर लैब की मदद से, कर सकता है। अपने से इलाज न करें।

यह कैसे फैलता है
WOAH के अनुसार LSD मुख्य रूप से ख़ून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है: काटने वाली मक्खियाँ, मच्छर और चिचड़ी। बीमार पशु के सीधे संपर्क की भूमिका छोटी है। इसीलिए मौसम गर्म होने और कीड़ों के सक्रिय रहने पर मामले बढ़ते हैं।
लंबी दूरी में यह संक्रमित पशुओं के लाने-ले जाने और ख़रीद-बिक्री के साथ फैलता है। हवा भी संक्रमित कीड़ों को दूर ले जा सकती है। वायरस चमड़ी की गाँठों में 35 दिन तक रह सकता है, और नाक व आँख के स्राव, दूध और वीर्य में भी मिल सकता है।
WOAH की बताई इथियोपिया की एक स्टडी में होल्स्टीन फ़्रीज़ियन और क्रॉसब्रीड पशु देसी ज़ेबू पशुओं से ज़्यादा बीमार पड़े। क्रॉसब्रीड रखते हैं तो उन पर ज़्यादा नज़र रखें।
भारत में अभी स्थिति कितनी गंभीर है
भारत में LSD का पहला मामला सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दर्ज हुआ था। DAHD की 8 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है, बीमारी की गंभीरता और मौतों में बड़ी गिरावट आई है। प्रभावित पशु आम तौर पर एक हफ़्ते में ठीक हो रहे हैं, और मामले ज़्यादातर छोटे पशुओं और बछड़ों में हैं।
WOAH व्यापक तस्वीर देता है: बीमार पड़ने वाले पशुओं का हिस्सा 10% से 20% के बीच रहता है, और मौतें आम तौर पर कम, यानी 1% से 5%। DAHD के अनुसार अब तक 36.18 करोड़ से ज़्यादा पशुओं का टीकाकरण या दोबारा टीकाकरण हो चुका है।
इस हफ़्ते क्या करें
DAHD ने राज्यों से कुछ क़दम उठाने को कहा है। फ़ार्म पर इनका मतलब यह है:
- पहले लक्षण पर पशु चिकित्सक को बुलाएँ। बुख़ार के साथ गाँठें होना काफ़ी कारण है। राज्यों से कहा गया है कि मामले आधिकारिक माध्यम से रिपोर्ट करें, और यह काम आपका पशु चिकित्सक या स्थानीय पशुपालन विभाग करता है।
- बीमार पशु को अलग रखें और आवाजाही रोकें। बीमार पशु को झुंड से दूर रखें। उन्हें बाज़ार या दूसरे फ़ार्म पर न ले जाएँ, और अपने पशुओं को आवारा पशुओं से दूर रखें।
- कीड़े कम करें। DAHD कीट नियंत्रण और कीटाणुशोधन गिनाता है। बाड़ा साफ़ और सूखा रखें, रुका हुआ पानी और गोबर के ढेर हटाएँ, और पशु चिकित्सक से पूछें कि दुधारू पशुओं के लिए कौन-सा कीट नियंत्रण सुरक्षित है।
- टीकाकरण जाँचें। DAHD समय पर टीकाकरण पर ज़ोर देता है, ख़ासकर बछियों और छोटे पशुओं का, और प्रकोप के आसपास रिंग टीकाकरण पर। पशु चिकित्सक से पूछें कि हर पशु का LSD टीका अद्यतन है या नहीं और आपके ज़िले में कौन-सा टीका लगता है।
- नए पशुओं को क्वारंटीन करें। नया ख़रीदा पशु झुंड में मिलाने से पहले कुछ समय अलग रखें। कितने समय के लिए, यह पशु चिकित्सक से पूछें।
- लिखकर रखें। हर पशु का तापमान, गाँठें, रोज़ का दूध और टीके की तारीख़ दर्ज करें। रिकॉर्ड से पशु चिकित्सक को मदद मिलती है और पता चलता है कि कौन-से पशु पिछड़ रहे हैं।

हर पशु का स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखने से यह आसान हो जाता है। Pashupaalak में आप हर गाय या भैंस के टीके दर्ज कर सकते हैं और देख सकते हैं कि क्या बाक़ी है और इस हफ़्ते क्या देय है। टीकाकरण चार्ट में आम पशु टीके एक जगह मिलते हैं। दूध घटने से आपके महीने पर क्या असर पड़ेगा, यह देखने के लिए आँकड़े डेयरी फ़ार्म मुनाफ़ा कैलकुलेटर में डालें। वेब ऐप पर मुफ़्त शुरू करें।



